बिहार के चुनाव के मायने तथा जनता की उम्मीदें
बिहार चुनाव के नतीजे आ चुके है, जैसा की बोला जा रहा था की ये नतीजे चौंकाने वाले भी हो सकते है! और हुआ भी वैसे ही है, क्यूंकि सभी एग्जिट पोल तेजस्वी यादव को सरकार बनाने के सब से नजदीक बता रहे थे तथा मुकाबला कांटे का बताया जा रहा था। नीतिश कुमार के लिए चुनौतियां कम न थी, एक तरफ लगातार सरकार होने के कारन विरोध की जनभावना होती है, कोरोना काल में बिहारी प्रवासियों के साथ आयी समस्या भी बहुत बड़ी थी, इन सब से परे चिराग पासवान का विरोधी हो जाना भी समस्या को और ज्यादा बढ़ा रहा था।
भाजपा शीर्ष नेतृत्व ने अपना विश्वास नीतिश कुमार पे कायम रखा तथा प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विकास और नीतिश कुमार के चेहरे को आगे रखा। परिणाम सुखद रहा, किन्तु अभी हमारा मुद्दा किस की सरकार बनी और कैसे बनी इस बात को ले कर नहीं है, हम ये समझना चाहते है की आम जन की भावनाओ का प्रतिनिधित्व किस स्तर पर हुआ है, जैसा की महागठबंधन द्वारा चुनाव की निष्पक्षता पे सवाल उठाया जा रहा है उस से ये ये बात जेहन में आना स्वभाविक है, गहन विश्लेषण से ये तथ्य स्पष्ट है की आरजेडी ने अपना रोल अच्छे से अदा किया, किन्तु कांग्रेस का प्रदर्शन सोचने पे मजबूर करता जा रहा है।
चाहे हम कर्णाटक की बात करे चाहे महराष्ट्रा की बात करे कांग्रेस सत्ता में बने रहने के लिए अपना मजबूत जनाधार लगातार खोती जा रही है, यही कारन बिहार चुनाव में भी स्पष्ट रूप से देखा गया है, जहा एक तरफ औवेसी की पार्टी बिना जनाधार होते हुए भी ५ सीट ले जाती है वहां पे कांग्रेस की स्तिथि बिलकुल ही स्पष्ट हो जाती है
नीतिश कुमार को इस जीत के लिए बधाई है, किन्तु आमजन के सामने जो समस्याएं है उनको दरकिनार नहीं किया जा सकता है, सुशांत सिंह राजपूत केस में महाराष्ट्र सरकार का रवैया संदेहस्पद है, बिहार के युवा कोरोना के बाद रोजगार के लिए स्थायी समाधान की उम्मीद लगा कर बैठे हुए है।
श्री राष्ट्रिय राजपूत करणी सेना हमेशा से जनाधार वाले मुद्दों को मुखर रूप से उठती रही है, तथा श्री सुखदेवे सिंह गोगामेड़ी का आज भी प्रयास है की बिहार के युवा के साथ न्याय हो, जैसा की सुनाने में आया है की बिहार सरकार आरक्षण को और ज़्यादा मजबूत करने वाली है, जो की स्वर्णो के साथ एक प्रकार का अन्याय ही होगा, स्वर्ण पहले से ही एट्रोसिटी एक्ट से प्रताड़ित है ऊपर से आरक्षण को बढ़ावा मिलने से पढ़े लिखे युवाओ का मनोबल टूटेगा।
कई बार ये भी देखा गया है, की स्वर्णो पे दलितों का नाम ले कर उन पर अत्याचार किया जाता है, अभी के वक्त में कुछ लोगो ने मिडिया के माध्यम से समाज को ये सन्देश देने का प्रयास किया है की स्वर्ण जाती वाले दलितों पे अत्याचार करते है, किन्तु सत्य इस से उलट है, दलितों के हितो की रक्षा के लिए राजपूत कौम ने हमेशा से प्रयास किया है तथा राजपूतो के नेतृत्व में दलितों के हितो की रक्षा ही हुई है। कुछ मौका परास्त राजनीती की दुकान चलने वालो को अपनी गद्दी बचने के लिए ये भद्दा खेल खेलने की आदत है।
धन्यवाद।
टीम सुखदेव सिंह गोगामेड़ी