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भारत हिंदू राष्ट्र - सामाजिक एकता और न्याय

भारत हिंदू राष्ट्र - सामाजिक एकता और न्याय

2021-02-24
Posted by: RRKS Admin

वर्तमान भारतीय समाज में या विश्व भर के भारतीयों में हिंदू शब्द की उत्पत्ति को लेकर एक बहस का विषय बना हुआ है । यह एक ऐसा विषय है, जो भारतीय प्राचीन सनातन धर्म के विचारों में सहमति ना रखने वाले समाज के एक वर्ग के लिए एक परेशानी का विषय है । भारतीय संविधान के अनुसार भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है, धर्मनिरपेक्षता के अनुसार भारत ना किसी धर्म को मानता है ना ही किसी धर्म का प्रचार करता है, वह सभी धर्मों को मानने वाला एक राष्ट्र है, परंतु हमें यह भी मानना होगा कि भारत हम अपने मूल विचारों से भारत हिंदू राष्ट्र(Bharat Hindu Rashtra) ही है । हमारी संस्कृति की मूल आत्मा में ही हिंदुत्व की भावना को सरोकार लिए हुए हैं|

भारतीय संस्कृति वसुधैव कुटुंबकम की भावना को लिए सभी धर्मों को मानते हुए संपूर्ण पृथ्वी को एक परिवार के रूप में माना है
, जिसमें न सिर्फ मनुष्य अपितु पशु, पक्षी और प्रकृति को भी एक परिवार के रूप में लिए हुए हैं । पुराने समय से हमारे समाज में एक बात कही गई है एकं संत विप्रा बहुधा वदति अर्थात विद्वान लोग एक ही बात को अपने अनुसार विभिन्न विभिन्न प्रकार से कह सकते हैं, इसीलिए भारतीयों की मूल भावना में मूल रूप से हिंदुत्व की भावनाएं ही दिखाई देती है।इतिहास में पीछे जाने पर हम जान पाते हैं कि भारत में सामाजिक एकता(Samajik Ekta) का अभाव होने के कारण हमारे ऊपर कई आक्रमण हुए जिसके कारण भारत में कई विचारधाराओं के लोगों ने अपनी बात को सर्वोपरि रखने के लिए तथा अपने आप को श्रेष्ठ बताने के लिए अपने धर्मों का विस्तार किया, और इन्हीं कारणों से भारत में कई विचारधारा वाले धर्मों का उद्भव हुआ ।

कुछ हजारों साल और इतिहास में पीछे जाने पर आप जानेंगे संपूर्ण मानवता का उद्भव अखंड भारत की पुण्य भूमि पर ही हुआ है
, इस बात के आधार पर अगर कहां जाए कि हम सब एक हैं| हमारे समाज का आधार एक ही है तो भारत को हिंदू राष्ट्र कहने में कोई बुराई नहीं है । हम बात करें भारतीय संविधान की तो विश्व में सभी देशों के संविधान में अपने इष्ट देव, ईश्वर को सर्वोपरि रखा गया है, तो भारत में ऐसा क्या हुआ जिससे हमने हमारे भगवान को भुला दिया । इतिहास के इस विषय पर गौर किया जाए तो समाज के साथ सामाजिक अन्याय की बात सामने आती है । एक ऐसे समाज जहां उसको अपने अस्तित्व के बारे में नहीं बताया जाता है, इसी बात का परिणाम है कि आज हम इस स्थिति में आ गए हैं कि हमें इस पर चर्चा करनी पड़ती है कि हम एक हिंदू राष्ट्र है ।

आज कुछ असामाजिक तत्व इन्हीं बातों को लेकर समाज को बांटने में लगे हुए हैं परंतु यह समय समाज को एकजुट होकर सामाजिक एकता(
Samajik Ekta) दिखाते हुए विकासशील भारत को पुन: विश्व गुरु बनाने का है । संपूर्ण भारत में अब वह समय आ चुका है समाज ने हिंदुत्व की भावना के समर्थक और पीड़ित दोनों ही पक्षों को अनुभव किया है, सामाजिक एकता का परिचय देते हुए भारत के समाज को न्याय(Samajik Nyaay) दिलाने के लिए और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक विकसित भारत का निर्माण करना होगा।

नए भारत के निर्माण तथा भविष्य का आधार बनाने के लिए हमसे जुड़े

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