भारत तथा भारतीयता
का अहसास हृदय
स्पेदान को शुकुन
देने वाला रहा
है। हम सनातन
संस्कृति के अग्रणी
है, ऐसे में
जब - जब हमारी
संस्कृति पर प्रहार
हुआ है, पुरे
देश ने एकजुट
होकर उसका जवाब
दिया है ।
किसान हितों की बात
करने वाले छद्म
सफेदपोश
लोगों के स्वार्थ
ने भारत की
छवि को धूमिक
करने का प्रयास
किया है, जो
अस्वीकार्य है ।
२६ जनवरी के
दिन जो तांडव
दिल्ली में हुआ
उसका इशारा कुछ
ऐसा नहीं है,
भारत की राजधानी
में पुलिस के
साथ बदसलूकी को
किसी भी स्तिथि
में जायज़ ठहराना,
सनातन सभ्यता तथा
राष्ट्र का अपमान
करने जैसा
है ।कुछ सफेदपोश
अपनी राजनीती हेतु
लाशों के ढेर
से भी गुरेज
नहीं करेंगे, ऐसे
में दिल्ली पुलिस
के अदभ्य पराक्रम
और साहस की
प्रशंसा जितनी की जाये
उतनी कम है
। क्योंकि उपद्रवी
चाहते थे दिल्ली
पुलिस गोली चलाये और व्यापक नरसंहार हो,
किन्तु दिल्ली पुलिस ने ऐसा नहीं किया ।
ऐसे में बड़ा सवाल ये
उठता है, कि वे कौन लोग है, जो भारत कि छवि को नुकसान पहुंचाना चाहते है, तथा भारत
के उभरते हुए स्वरूप को नकारना चाहते है| एप्पल कंपनी में तोड़मोड़, covid 19 की दवा
का जहाँ स्टॉक होता है, वहाँ पर आगजनी, दिल्ली की लगातार घेराबंदी बड़ी साजिश की तरफ
इशारा करते है।CAA, NRCके वक़्त शाहीन बाग़ हुआ और अभी किसान बिल के नाम पर दिल्ली के
सभी बॉर्डर रोके गये।
ऐसे में श्री
राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना
तथा सुखदेव सिंह
गोगामेड़ी का रुख
साफ़ है, किसानो
को अपनी बात
रखने का हक़
संविधान ने दिया
है, आप सरकार
के खिलाफ आंदोलन
कर सकते है,
किन्तु आम जन
का रास्ता नहीं
रोक सकते ।
आंदोलन मॉ पद्मावत के सम्मान में हमने
भी किये, जिसमे
शरारती तत्वो द्वारा पधराव
होने से हमें
"गुंडों" की सेना
नाम दिया गया
।
इतिहास गवाह है,
हमने आम जनता
को कभी भी
परेशान में नहीं
डाला, सुखदेव सिंह
गोगामेड़ी के नेतृत्त्व
में राजस्थान विधान
सभा को घेराव
स्वर्ण आरक्षण हेतु किया,
उज्ज्जैन तथा इंदौर
में लाखों की
भीड़ होने पर
भी आंदोलन उग्र
नहीं हुआ ।अतः
श्री राष्ट्रीय राजपूत
करणी सेना वर्तमान
किसान आंदोलन के
माध्यम से भारतीय
छवि को धूमिल
करने के प्रयास
की निन्दा करती है।
अभी कोई पोर्न
स्टार, तथा विदेशी
सेलिब्रिटी द्वारा किसान आंदोलन
के तहत भारत
का नाम उछालने
का प्रयास किया गया
है, जो महज
संयोग नहीं हो
सकता है ।
हमारा मानना है,
कि आप लोग
पार्टी अथवा विशेष
से वैमनस्य
रख सकते है,
किन्तु ऐसे में
ये बात अवश्य
याद रखें ये
भारतवर्ष न किसी
व्यक्ति विशेष का है,
तथा न ही
पार्टी विशेष का ।
ये संम्भव है,
कि हमारे आपसी
विचार मेल न
खाते हो, किन्तु
इसका तात्पर्य ये
नहीं है, कि
हम हमारे आदर्श
तत्क पर रख दे।
श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी
सेना देश की
आन- बान - शान
हेतु अपना स्वर्सव
न्यौछावर करने की
क्षमता रखती है।
आंदोलन करना है,
तो समान अधिकारों
के लिए करो,
समान अवसरों की
उपलब्धि हेतु
आरक्षण व्यवस्था तथा अस्पश्यिता
कानून के खिलाफ
लड़ो, शिक्षा तथा
स्वस्थय का व्यवसायिकरण बंद
करते हुए इनको
जनउपयोगी बनाने हेतु आंदोलन
करो सुखदेव सिंह
गोगामेड़ी अंतिम सांस तक
इन आंदोलन का
अग्रणी रहेगा, किन्तु आंदोलन
के नाम पर
आम जनता को
बंधक बनाना, हिंसा
को बढ़ाना, तोड़-तोड़ करना
व् राष्ट्र की
छवि को धुमकी
करना बंद करो
।