प्रतिस्पर्धी बाजार में कीमतों का आकलन मांग तथा आपूर्ति द्वारा तय किया जाता है, भारत में पेट्रोलियम पदार्थों पर नियंत्रण २०१० में तात्कालिक सरकार द्वारा हटा लिया गया था, जिसका सीधा सा तात्पर्य ये था की पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतें बाजार आधारित हो गयी। उस वक्त वर्तमान सरकार विपक्ष में थी, तथा काफी हाय-तौबा हुई थी। आज स्तिथि काफी उलट है।
श्री राष्ट्रिय राजपूत करणी सेना इस सम्बन्ध में सिर्फ इतना कहना चाहती है, की चयनात्मक तथा मौका-परस्ती की राजनीती में चाहे सरकार हो या विपक्ष किसी को भी आम जनता से कुछ लेना देना नहीं है, आम जनता को हमेशा इस बात का खामियाजा उठाना पड़ा है, आज सम्पूर्ण विश्व में पेट्रोल के दाम अपने न्यूनतम स्तर पर है, किन्तु उसका फायदा आम-जन को नहीं मिल पा रहा है। हम इस बात से भी पूरी तरह से सहमत है कि कोरोना के बाद आबकारी तथा पेट्रोलियम पदार्थ ही ऐसे है जिन से सरकार के राजस्व घाटे कि भरपाई कि जा सकती है, किन्तु इसका तात्पर्य ये नहीं है के इसके लिए गला-काट स्पर्धा को खुली छूट दे दी जाए? जनता को भगवान भरोषे नहीं रखा जा सकता है।
किसी भी लूट कि एक सीमा अवश्य होती है, आप सरकारें अपना राजस्व घाटा पूरा करने के लिए जनता के पैसे पे निगाह नहीं रख सकते, सब से बड़ी विडंबना इस बात को ले कर है कि वर्तमान मुख्य राजनितिक दल एक दूसरे पर कीचड़ उछालने में मस्त है , और आम जन तमाशबीन बना देख रहा है, ऐसा कब तक चलेगा?
समाज परिवर्तन चाहता है, तथा माननीय प्रधानमंत्री जी को सम्मान भी देता है, किन्तु पेट्रोल-डीजल के दाम जिस तरह से बढ़ते चले जा रहे है, तथा उन पर कोई भी लगाम नहीं लग रही है वो अपने आप में निराशाजनक है। कांग्रेस कि माने तो भाजपा सरकार इसका फायदा उठा रही है, किन्तु जहा पे राज्य में कांग्रेस कि सरकार है, वहाँ पे भी हालत कुछ ज्यादा अच्छे नहीं है। तात्पर्य ये है कि सभी सरकारें अपनी-अपनी जेब भरने में लगी हुई है, चाहे वो घाटे कि भरपाई के नाम पे हो अथवा विकास के नाम पर।
महत्वूर्ण ये नहीं है कि कीमतें बाजार तय कर रहा है, यहाँ पे मुख्य मुद्दा इस बात को ले कर है कि केंद्र तथा राज्य सरकारें जब-जब अंतराष्ट्रीय बाजार कि कीमतें कम होती है तब-तब केंद्रीय उत्पाद शुल्क तथा राज्य वेट बढ़ा दिया जाता है, कुछ राज्य इसका सीधा लाभ अपनी राज्य कि जनता को दे देते है जबकि कुछ राज्य ऐसा नहीं करते। ऐसे में कीमतों को बाजार आधारित कहना बेमानी होगा, इस से अच्छा तो कीमत निर्धारण है जहाँ पे जनता को आश्वस्तता तो रहती है।
वर्तमान लूट का असर आम-जन पे निम्न प्रकार से है
व्यक्तिगत परिवहन महंगा होता जा रहा है, जिसका असर जेब पर सीधे तरीके से देखा जा सकता है, जहाँ एक और कोरोना के बाद आजीविका के लिए आम इंसान को संघर्ष करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ आवगमन के लिए भी और ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ रहा है।
व्यवसायिक परिवहन भी पेट्रोलियम पदार्थों कि बढ़ती कीमतों सीधे तौर पर प्रभावित हुआ है, जिस से आम जन-जीवन से जुड़ी हुई सभी वस्तुओ का परिवहन महंगा होता जा रहा है, जिसका सीधा असर रसोई के बजट पर पड़ रहा है ।
ऐसे में पेट्रोलिम मंत्रालय द्वारा जारी वक्तव्य सरकार कि निष्ठा पर संदेह उत्त्पन्न करता है, सुखदेव सिंह गोगामेड़ी अन्याय के विरुद्ध हमेशा से संघर्षरत रहे है, ऐसे में आम जन से जुड़ा ये मुद्दा श्री राष्ट्रिय राजपूत करणी सेना तथा गोगामेड़ी जी के लिए निहायत ही आवश्यक है कि वो आम जन का हित सरकार तथा उनके पैरोकारों तक पहुंचाए।
३ मार्च को संगठन का स्थापना दिवस है, तथा जयपुर के विधाधर नगर स्टेडियम के मंच के माध्यम से सरकार को स्पष्ट सन्देश दिया जाएगा कि हम इस अन्याय के खिलाफ है, इसके लिए सरकार तथा उनके नुमाइंदो को सोचना तथा समझाना पड़ेगा, समाज चुप नहीं बैठेगा।
धन्यवाद।
टीम सुखदेव सिंह गोगामेड़ी